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इटवा में ‘मौत की टंकी’: भ्रष्टाचार की आंधी में उखड़ गई जल जीवन मिशन की साख!

हल्की बारिश ने खोला विकास का पोल, करहिया पुल के पास खौफ का साया—कभी भी गिर सकती है पानी की टंकी!

अजीत मिश्रा (खोजी)

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी जल जीवन मिशन की ‘मौत की टंकी’, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा!

सिद्धार्थनगर | ब्यूरो रिपोर्ट (बस्ती मंडल)

  • नल से जल तो नहीं पहुँचा, पर ‘यमराज’ को न्योता देने लगी जर्जर पानी की टंकी!
  • अधिकारियों की चुप्पी या हादसे का इंतज़ार? इटवा में लटकती ‘मौत की टंकी’ से सहमे ग्रामीण।
  • करोड़ों की लागत और पहली ही आंधी में जवाब दे गया ढांचा; क्या यही है जल जीवन मिशन की गुणवत्ता?
  •  विकास के नाम पर भ्रष्टाचार का ‘स्मारक’, ग्रामीणों ने कहा—हटाओ यह ‘मौत की टंकी’!

इटवा: विकास के दावों और ‘नल से जल’ पहुँचाने की सरकारी फाइलों में चाहे कितनी भी चमक हो, लेकिन धरातल पर भ्रष्टाचार की जंग लगी परतें अब जानलेवा साबित हो रही हैं। सिद्धार्थनगर के इटवा नगर पंचायत अंतर्गत करहिया पुल के पास बनी पानी की टंकी जल जीवन मिशन की कार्यप्रणाली पर एक बदनुमा दाग बनकर खड़ी है। महज हल्की सी आंधी और बारिश ने इस ढांचे की ऐसी हालत कर दी है कि यह अब लोगों के लिए प्यास बुझाने का जरिया नहीं, बल्कि ‘यमराज का निमंत्रण’ नजर आ रही है।

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हल्की आंधी ने खोली निर्माण की पोल

आश्चर्य की बात यह है कि जिस टंकी को दशकों तक टिकना चाहिए था, वह मामूली मौसम बदलाव को भी सहन नहीं कर सकी। टंकी का ढांचा क्षतिग्रस्त होकर हवा में झूलने की स्थिति में पहुँच गया है। यह साफ तौर पर दर्शाता है कि निर्माण में प्रयुक्त सामग्री और तकनीक के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई है। क्या यह भ्रष्टाचार नहीं है कि करोड़ों की लागत से बनी परियोजना पहली बारिश में ही ताश के पत्तों की तरह ढहने को तैयार है?

ग्रामीणों में दहशत: ‘मौत की टंकी’ का साया

स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। इलाके में डर का ऐसा माहौल है कि लोग उसके पास से गुजरने में भी कतरा रहे हैं। ग्रामीणों ने इसे “मौत की टंकी” का नाम दिया है। लोगों का कहना है कि:

“यह टंकी विकास नहीं, बल्कि हमारे सिर पर लटकती तलवार है। प्रशासन शायद किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है, तभी तो सूचना मिलने के बाद भी अब तक कोई हरकत नहीं हुई।”

प्रशासनिक मौन पर खड़े हो रहे सवाल

घटना की सूचना प्रशासन को दे दी गई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी शायद गहरी नींद में हैं। अभी तक मौके पर न तो सुरक्षा के कोई इंतजाम किए गए हैं और न ही इसे हटाने की कोई प्रक्रिया शुरू हुई है। क्या प्रशासन की यह सुस्ती किसी निर्दोष की जान जाने के बाद टूटेगी?

जनता की मांग: जाँच और कार्रवाई

  • इटवा की जनता अब आर-पार के मूड में है। ग्रामीणों ने दो टूक मांग की है:
  • तत्काल ध्वस्तीकरण: इस जर्जर टंकी को तुरंत हटाया जाए ताकि जान-माल का नुकसान न हो।
  • उच्चस्तरीय जांच: निर्माण कार्य में हुई धांधली की जांच हो और ठेकेदार व संबंधित इंजीनियरों पर मुकदमा दर्ज किया जाए।
  • रिकवरी: भ्रष्टाचार से बर्बाद हुए जनता के टैक्स के पैसे की वसूली दोषियों की संपत्ति से की जाए।

जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर घर खुशहाली पहुँचाना था, लेकिन करहिया पुल के पास यह मिशन ‘खौफ का मिशन’ बन चुका है। अब देखना यह है कि सिद्धार्थनगर प्रशासन इस ‘मौत की टंकी’ पर कब एक्शन लेता है या फिर भ्रष्टाचार की यह इमारत यूं ही लोगों की जान से खिलवाड़ करती रहेगी।

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